श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 34: सीता के अनुरोध से सरमा का उन्हें मन्त्रियों सहित रावण का निश्चित विचार बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.34.13 
एष ते यद्यभिप्रायस्तस्माद् गच्छामि जानकि।
गृह्य शत्रोरभिप्रायमुपावर्तामि मैथिलि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'मिथिलेशपुत्री जनकननदिनी! यदि तुम्हारी यही इच्छा है तो मैं जा रहा हूँ और शत्रु का अभिप्राय जानकर अभी लौट आता हूँ।'॥13॥
 
"Mithilesha's daughter Janakanandini! If this is your wish then I am going and after knowing the enemy's intentions I will return now.'॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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