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ramayan 6.34.1: रावण के शब्दों से मंत्रमुग्ध और व्यथित सीता, शर्मा के शब्दों से उसी प्रकार प्रसन्न हो गयीं, जैसे वर्षा ऋतु में बादल ग्रीष्म ऋतु की तपती हुई पृथ्वी को प्रसन्न कर देते हैं।   |   ramayan सर्ग 6.34: सीता के अनुरोध से सरमा का उन्हें मन्त्रियों सहित रावण का निश्चित विचार बताना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 34: सीता के अनुरोध से सरमा का उन्हें मन्त्रियों सहित रावण का निश्चित विचार बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.34.1 
अथ तां जातसंतापां तेन वाक्येन मोहिताम्।
सरमा ह्लादयामास महीं दग्धामिवाम्भसा॥ १॥
 
 
अनुवाद
रावण के शब्दों से मंत्रमुग्ध और व्यथित सीता, शर्मा के शब्दों से उसी प्रकार प्रसन्न हो गयीं, जैसे वर्षा ऋतु में बादल ग्रीष्म ऋतु की तपती हुई पृथ्वी को प्रसन्न कर देते हैं।
 
Sita, who was mesmerized and distressed by Ravana's words, was cheered by Sharma's words in the same way as the clouds in the rainy season cheer up the earth scorched by the heat of summer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)