श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 33: सरमा का सीता को सान्त्वना देना, रावण की माया का भेद खोलना, श्रीराम के आगमन और उनके विजयी होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.33.21 
संनाहजननी ह्येषा भैरवा भीरु भेरिका।
भेरीनादं च गम्भीरं शृणु तोयदनि:स्वनम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अश्रुपूर्ण! यह भयानक तुरही ध्वनि हमें युद्ध की तैयारियों का संकेत दे रही है। तुम भी युद्ध की तुरही की उस गहरी ध्वनि को सुनो जो बादलों की गर्जना के समान है।
 
Tearful one! This terrifying trumpet sound is informing us of preparations for war. You too should listen to the deep sound of the war trumpet which is like the roar of the clouds.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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