श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.32.7 
सा मुहूर्तात् समाश्वस्य परिलभ्याथ चेतनाम्।
तच्छिर: समुपास्थाय विललापायतेक्षणा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
फिर दो घड़ी में उसे होश आ गया और बड़े-बड़े नेत्रों वाली सीता कुछ धैर्य धारण करके सिर को अपने पास रखकर विलाप करने लगीं-॥7॥
 
Then in two hours she regained consciousness and the big-eyed Sita, gathering some patience, kept the head close to her and started lamenting -॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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