श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.32.5 
आर्येण किं नु कैकेय्या: कृतं रामेण विप्रियम्।
यन्मया चीरवसनं दत्त्वा प्रव्राजितो वनम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
आर्य श्री राम ने कैकेयी का ऐसा कौन-सा अपराध किया था, जिसके कारण उसने उन्हें चीथड़ा देकर मेरे साथ वन में भेज दिया?’ ॥5॥
 
What crime did Arya Shri Ram commit against Kaikeyi, due to which she gave him a rag and sent him to the forest with me?' ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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