vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना
»
श्लोक 35
श्लोक
6.32.35
विजयस्वार्यपुत्रेति सोऽभिवाद्य प्रसाद्य च।
न्यवेदयदनुप्राप्तं प्रहस्तं वाहिनीपतिम्॥ ३५॥
अनुवाद
उन्होंने रावण को ‘आर्यपुत्र महाराज की जय’ कहकर अभिवादन किया और उसे प्रसन्न करते हुए बताया कि ‘सेनापति प्रहस्त आ गये हैं।’ 35.
He greeted Ravana by saying, 'Hail Aryaputra Maharaja' and, making him happy, informed him that 'Commander Prahast has arrived.' 35.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd