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श्लोक 6.32.25  |
प्रव्रज्यामुपपन्नानां त्रयाणामेकमागतम्।
परिप्रेक्ष्यति कौसल्या लक्ष्मणं शोकलालसा॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| हम तीनों व्यक्ति एक साथ वन में आये थे; परन्तु अब शोक से पीड़ित माता कौशल्या केवल एक ही व्यक्ति लक्ष्मण को घर लौटते हुए देख सकेंगी॥ 25॥ |
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| ‘We three persons had come to the forest together; but now the grief-stricken mother Kausalya will be able to see only one person, Lakshmana, returning home.॥ 25॥ |
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