श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.32.22 
कस्मान्मामपहाय त्वं गतो गतिमतां वर।
अस्माल्लोकादमुं लोकं त्यक्त्वा मामपि दु:खिताम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे गतियों में श्रेष्ठ रघुनन्दन! आप मुझे अपने साथ वन में क्यों ले गए और यहाँ दुःख में छोड़कर इस लोक से परलोक क्यों चले गए?॥ 22॥
 
O best of the moving ones, Raghunandan! Why did you take me with you to the forest and leave me here in misery and go from this world to the other world?॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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