श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.32.20 
किं मां न प्रेक्षसे राजन् किं वा न प्रतिभाषसे।
बालां बालेन सम्प्राप्तां भार्यां मां सहचारिणीम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आपने मुझे बचपन में ही पत्नी बना लिया था। मैं आपकी सहचरी हूँ, जो सदैव आपके साथ रहती हूँ। आप मेरी ओर क्यों नहीं देखते और मेरे प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं देते?॥ 20॥
 
‘O King! You took me as your wife when you were very young. I am your companion who always moves with you. Why don't you look at me or answer my question?॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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