श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.32.19 
दिवि नक्षत्रभूतं च महत्कर्मकृतं तथा।
पुण्यं राजर्षिवंशं त्वमात्मन: समुपेक्षसे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
पिता की आज्ञा का पालन करने का महान् कर्म करके अपार पुण्य अर्जित करके तू आकाश में तारों के समान चमकने वाले अपने राजकुल की उपेक्षा करके (उसका परित्याग करके) यहाँ से जा रहा है (ऐसा तुझे नहीं करना चाहिए)।॥19॥
 
After having earned immense merit by performing the great deed of obeying your father's orders, you are going away from here neglecting your royal clan (abandoning it), which shines like stars in the sky (you should not do this).॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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