श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 32: श्रीराम के मारे जाने का विश्वास करके सीता का विलाप तथा रावण का सभा में जाकर मन्त्रियों के सलाह से युद्धविषयक उद्योग करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.32.11 
सा श्वश्रूर्मम कौसल्या त्वया पुत्रेण राघव।
वत्सेनेव यथा धेनुर्विवत्सा वत्सला कृता॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! जैसे अपने बछड़े के प्रति प्रेम से भरी हुई गाय अपने बछड़े से अलग हो जाती है, वैसी ही मेरी सास कौशल्या की भी दशा है। वह दयालु माता आप जैसे पुत्र से अलग हो गई॥ 11॥
 
‘Raghunandan! Just as a cow filled with love for her calf is separated from its calf, the same is the plight of my mother-in-law Kausalya. That compassionate mother was separated from a son like you.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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