श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 31: मायारचित श्रीराम का कटा मस्तक दिखाकर रावण द्वारा सीता को मोह में डालने का प्रयत्न  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.31.41 
अग्रत: कुरु सीताया: शीघ्रं दाशरथे: शिर:।
अवस्थां पश्चिमां भर्तु: कृपणा साधु पश्यतु॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तुम शीघ्र ही दशरथपुत्र राम का सिर सीता के सामने रख दो, जिससे वह बेचारी अपने पति की अन्तिम अवस्था को भली-भाँति देख सके।’ ॥41॥
 
You should quickly place the head of Rama, son of Dasharatha, in front of Sita, so that the poor lady may properly see the final state of her husband.' ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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