श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 31: मायारचित श्रीराम का कटा मस्तक दिखाकर रावण द्वारा सीता को मोह में डालने का प्रयत्न  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.31.37 
तत: परमदुर्धर्षो रावणो राक्षसेश्वर:।
सीतायामुपशृण्वन्त्यां राक्षसीमिदमब्रवीत्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
'ऐसा कहकर अत्यन्त अजेय राक्षसराज रावण ने सीता के सामने राक्षसी से कहा-॥37॥
 
‘Having said this, the extremely invincible demon king Ravana said to a demoness in front of Sita -॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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