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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 31: मायारचित श्रीराम का कटा मस्तक दिखाकर रावण द्वारा सीता को मोह में डालने का प्रयत्न
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श्लोक 3
श्लोक
6.31.3
मन्त्रिण: शीघ्रमायान्तु सर्वे वै सुसमाहिता:।
अयं नो मन्त्रकालो हि सम्प्राप्त इति राक्षसा:॥ ३॥
अनुवाद
मेरे सभी मंत्री एकाग्र होकर शीघ्र ही यहाँ आएँ। हे दैत्यों! यह समय हमारे गुप्त विचार-विमर्श का है।॥3॥
‘All my ministers should concentrate and come here quickly. O demons! This is the time for us to hold secret discussions.'॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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