श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 31: मायारचित श्रीराम का कटा मस्तक दिखाकर रावण द्वारा सीता को मोह में डालने का प्रयत्न  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  6.31.22-23 
पट्टिशान् परिघांश्चक्रानृष्टीन् दण्डान् महायुधान्।
बाणजालानि शूलानि भास्वरान् कूटमुद‍्गरान्॥ २२॥
यष्टीश्च तोमरान् प्रासांश्चक्राणि मुसलानि च।
उद्यम्योद्यम्य रक्षोभिर्वानरेषु निपातिता:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'उस समय राक्षसों ने तलवारें, भाले, चक्र, बर्छे, दण्ड, बड़े-बड़े हथियार, बाणों के समूह, त्रिशूल, चमकदार गदा और गदा, गदा, कुल्हाड़ी, भाले और मूसल लेकर वानरों पर आक्रमण कर दिया।
 
‘At that time the demons picked up swords, spears, discuses, spears, dandas, large weapons, groups of arrows, tridents, shiny clubs and maces, clubs, axes, spears and pestles and attacked the monkeys.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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