श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 30: रावण के भेजे हुए गुप्तचरों एवं शार्दूल का उससे वानर-सेना का समाचार बताना और मुख्य-मुख्य वीरों का परिचय देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.30.7 
प्रविष्टमात्रे ज्ञातोऽहं बले तस्मिन् विचारिते।
बलाद् गृहीतो रक्षोभिर्बहुधास्मि विचारित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
ज्यों ही मैं उस सेना में घुसकर उसकी चाल देखने लगा, त्यों ही विभीषण के साथ आए राक्षसों ने मुझे पहचान लिया और बलपूर्वक मुझे पकड़कर बार-बार घुमाने लगे॥ 7॥
 
As soon as I entered that army and began to observe its movements, the demons accompanying Vibhishana recognised me and forcibly caught hold of me and turned me around repeatedly.॥ 7॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas