श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 30: रावण के भेजे हुए गुप्तचरों एवं शार्दूल का उससे वानर-सेना का समाचार बताना और मुख्य-मुख्य वीरों का परिचय देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.30.5 
न ते चारयितुं शक्या राजन् वानरपुङ्गवा:।
विक्रान्ता बलवन्तश्च राघवेण च रक्षिता:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! उन श्रेष्ठ वानरों की गतिविधियों का पता गुप्तचरों द्वारा भी नहीं लगाया जा सकता। वे अत्यन्त वीर, पराक्रमी हैं और श्री रामचन्द्रजी द्वारा रक्षित हैं।'
 
‘King! The movements of those excellent monkeys cannot be traced by spies. They are very valiant, powerful and are protected by Shri Ramchandraji. 5.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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