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ramayan 6.30.3: निश्चर! तुम्हारे शरीर की कांति पहले जैसी नहीं रही। तुम दुःखी दिखाई देते हो। क्या तुम अपने क्रुद्ध शत्रुओं के हाथ पड़ गए हो?॥3॥   |   ramayan सर्ग 6.30: रावण के भेजे हुए गुप्तचरों एवं शार्दूल का उससे वानर-सेना का समाचार बताना और मुख्य-मुख्य वीरों का परिचय देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.30.3 
अयथावच्च ते वर्णो दीनश्चासि निशाचर।
नासि कच्चिदमित्राणां क्रुद्धानां वशमागत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
निश्चर! तुम्हारे शरीर की कांति पहले जैसी नहीं रही। तुम दुःखी दिखाई देते हो। क्या तुम अपने क्रुद्ध शत्रुओं के हाथ पड़ गए हो?॥3॥
 
Nishchar! The glow of your body is not the same as before. You look sad. Did you fall into the hands of your enraged enemies?'॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)