श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 30: रावण के भेजे हुए गुप्तचरों एवं शार्दूल का उससे वानर-सेना का समाचार बताना और मुख्य-मुख्य वीरों का परिचय देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.30.28 
पुत्रो दशरथस्यैष सिंहसंहननो युवा।
दूषणो निहतो येन खरश्च त्रिशिरास्तथा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
दशरथनंदन श्री राम की मूर्ति सिंह के समान सुगठित है। वे युवावस्था में हैं। उन्होंने अकेले ही खर-दूषण और त्रिशिरा का वध किया था॥ 28॥
 
‘The idol of Dasharathanandan Shri Ram is as well built as a lion. He is in his youth. He alone killed Khar-Dushana and Trishira.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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