श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 30: रावण के भेजे हुए गुप्तचरों एवं शार्दूल का उससे वानर-सेना का समाचार बताना और मुख्य-मुख्य वीरों का परिचय देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.30.27 
दश वानरकोटॺश्च शूराणां युद्धकाङ्क्षिणाम्।
श्रीमतां देवपुत्राणां शेषं नाख्यातुमुत्सहे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
देवताओं से उत्पन्न ऐसे तेजस्वी एवं पराक्रमी वानरों की संख्या दस करोड़ है। वे सभी युद्ध की इच्छा रखते हैं। इनके अतिरिक्त शेष वानरों के विषय में मैं कुछ नहीं कह सकता, क्योंकि उनकी गणना करना असम्भव है॥ 27॥
 
‘The number of such illustrious and valiant monkeys born from the gods is ten crores. All of them desire war. Apart from these, I cannot say anything about the remaining monkeys because counting them is impossible.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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