श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 30: रावण के भेजे हुए गुप्तचरों एवं शार्दूल का उससे वानर-सेना का समाचार बताना और मुख्य-मुख्य वीरों का परिचय देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.30.25 
नप्ता शक्रस्य दुर्धर्षो बलवानङ्गदो युवा।
मैन्दश्च द्विविदश्चोभौ बलिनावश्विसम्भवौ॥ २५॥
 
 
अनुवाद
बलवान और दुर्जय योद्धा अंगद इन्द्र के पौत्र हैं। वे अभी युवा हैं। महाबली वानर मैन्द और द्विविद - ये दोनों अश्विनीकुमारों के पुत्र हैं। 25॥
 
The strong and formidable warrior Angad is the grandson of Indra. He is still young. The powerful monkeys Mainda and Dwivid – both of them are the sons of Ashwinikumars. 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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