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श्लोक 6.30.18  |
तथात्र प्रतिपत्स्यामि ज्ञात्वा तेषां बलाबलम्।
अवश्यं खलु संख्यानं कर्तव्यं युद्धमिच्छता॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| उन वानरों का बल जानकर मैं उसके अनुसार अपना कर्तव्य निश्चित करूँगा। युद्ध की इच्छा रखने वाले मनुष्य को अपनी और शत्रु की सेना के बल की गणना करके उसके विषय में आवश्यक जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।॥18॥ |
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| After knowing the strength of those monkeys, I will decide my duty accordingly. A man who desires war must calculate the strength of his and the enemy's army and know the necessary information about it.'॥ 18॥ |
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