श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 30: रावण के भेजे हुए गुप्तचरों एवं शार्दूल का उससे वानर-सेना का समाचार बताना और मुख्य-मुख्य वीरों का परिचय देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.30.17 
किंप्रभा: कीदृशा: सौम्य वानरा ये दुरासदा:।
कस्य पुत्राश्च पौत्राश्च तत्त्वमाख्याहि राक्षस॥ १७॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! ये दुर्जय वानर किस प्रकार के हैं? इनका प्रभाव क्या है? तथा ये किसके पुत्र और पौत्र हैं? राक्षस! ये सब बातें मुझे ठीक-ठीक बताओ॥17॥
 
Soumya! What kind of monkeys are these Durjays? What is their influence? And whose sons and grandsons are they? Demons! Tell me all these things precisely.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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