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श्लोक 6.30.17  |
किंप्रभा: कीदृशा: सौम्य वानरा ये दुरासदा:।
कस्य पुत्राश्च पौत्राश्च तत्त्वमाख्याहि राक्षस॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| सौम्य! ये दुर्जय वानर किस प्रकार के हैं? इनका प्रभाव क्या है? तथा ये किसके पुत्र और पौत्र हैं? राक्षस! ये सब बातें मुझे ठीक-ठीक बताओ॥17॥ |
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| Soumya! What kind of monkeys are these Durjays? What is their influence? And whose sons and grandsons are they? Demons! Tell me all these things precisely.॥ 17॥ |
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