श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.3.32 
प्लवमाना हि गत्वा त्वां रावणस्य महापुरीम्।
सपर्वतवनां भित्त्वा सखातां च सतोरणाम्।
सप्राकारां सभवनामानयिष्यन्ति राघव॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
रघुनंदन! ये अंगद आदि वीर आकाश में उछलते हुए रावण की महान नगरी लंका में पहुँचकर उसे पर्वत, वन, खाइयों, द्वार, दीवार और घरों सहित नष्ट कर देंगे और सीताजी को यहाँ ले आएंगे॥32॥
 
Ragunandan! These heroes like Angad and others, jumping in the sky, will reach Ravana's great city Lanka, destroy it along with mountains, forests, ditches, doors, walls and houses and bring Sitaji here. 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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