श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.3.30 
येन केन तु मार्गेण तराम वरुणालयम्।
हतेति नगरी लङ्का वानरैरुपधार्यताम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
"हम किसी न किसी प्रकार समुद्र पार कर लेंगे, तब समझो कि लंका वानरों द्वारा नष्ट हो गयी।" 30.
 
"Let us cross the ocean by some means or the other; then consider Lanka to be destroyed by the monkeys." 30.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd