श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.3.29 
ते मया संक्रमा भग्ना: परिखाश्चावपूरिता:।
दग्धा च नगरी लङ्का प्राकाराश्चावसादिता:।
बलैकदेश: क्षपितो राक्षसानां महात्मनाम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
"परन्तु मैंने उन सभी दुर्गों को नष्ट कर दिया है, खाइयों को भर दिया है, लंकापुरी को जला दिया है और उसकी प्राचीरें नष्ट कर दी हैं। इतना ही नहीं, मैंने वहाँ उपस्थित विशाल राक्षसों की एक-चौथाई सेना का भी नाश कर दिया है।"
 
‘But I have destroyed all those fortifications, filled up the trenches, burnt Lankapuri and destroyed its ramparts. Not only this, I have destroyed one-fourth of the army of huge demons present there.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd