श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.3.28 
शतशोऽथ सहस्राणि मध्यमं स्कन्धमाश्रिता:।
यातुधाना दुराधर्षा: साग्रकोटिश्च रक्षसाम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
लंकाके मध्यभागमें जो शिविर है, उसमें लाखों अजेय राक्षस रहते हैं, जिनकी संख्या एक करोड़ से भी अधिक है॥ 28॥
 
‘In the camp in the centre of Lanka live hundreds of thousands of invincible demons, whose number exceeds one crore.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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