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श्लोक 6.3.28  |
शतशोऽथ सहस्राणि मध्यमं स्कन्धमाश्रिता:।
यातुधाना दुराधर्षा: साग्रकोटिश्च रक्षसाम्॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| लंकाके मध्यभागमें जो शिविर है, उसमें लाखों अजेय राक्षस रहते हैं, जिनकी संख्या एक करोड़ से भी अधिक है॥ 28॥ |
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| ‘In the camp in the centre of Lanka live hundreds of thousands of invincible demons, whose number exceeds one crore.॥ 28॥ |
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