श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.3.27 
न्यर्बुदं रक्षसामत्र उत्तरद्वारमाश्रितम्।
रथिनश्चाश्ववाहाश्च कुलपुत्रा: सुपूजिता:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस नगर के उत्तरी द्वार पर एक करोड़ राक्षस रहते हैं। उनमें से कुछ रथी हैं और कुछ घुड़सवार। वे सभी कुलीन कुलों में उत्पन्न हुए हैं और अपनी वीरता के लिए प्रशंसित हैं॥ 27॥
 
‘At the northern gate of that city live one hundred million demons. Some of them are charioteers and some are horse-riders. All of them are born in noble families and are praised for their bravery.॥ 27॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd