श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.3.25 
नियुतं रक्षसामत्र दक्षिणद्वारमाश्रितम्।
चतुरङ्गेण सैन्येन योधास्तत्राप्यनुत्तमा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
लंका के दक्षिणद्वार पर चतुर्भुज सेना सहित एक लाख राक्षस योद्धा तैनात हैं। वहाँ के सैनिक भी बड़े वीर हैं॥ 25॥
 
‘One lakh demon warriors along with the four-fold army are stationed at the southern gate of Lanka. The soldiers there are also very brave.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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