श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.3.23 
परिखाश्च शतघ्न्यश्च यन्त्राणि विविधानि च।
शोभयन्ति पुरीं लङ्कां रावणस्य दुरात्मन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
खाइयाँ, शतघ्नियाँ और नाना प्रकार के यंत्र उस दुष्ट रावण की लंका नगरी की शोभा बढ़ाते हैं॥ 23॥
 
‘Trenches, Shataghanis and various kinds of machines enhance the beauty of that evil-minded Ravana's city of Lanka.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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