श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.3.22 
शैलाग्रे रचिता दुर्गा सा पूर्देवपुरोपमा।
वाजिवारणसम्पूर्णा लङ्का परमदुर्जया॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वह दुर्गम नगरी पर्वत की चोटी पर बसी हुई है और देवताओं की नगरी के समान शोभायमान है। हाथी और घोड़ों से युक्त वह लंका जीतना अत्यंत कठिन है।॥22॥
 
‘That inaccessible city is built on the top of a mountain and looks as beautiful as the city of Gods. Filled with elephants and horses, that Lanka is extremely difficult to conquer. ॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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