श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.3.21 
स्थिता पारे समुद्रस्य दूरपारस्य राघव।
नौपथश्चापि नास्त्यत्र निरुद्देशश्च सर्वत:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'रघुनन्दन! यह बहुत दूर समुद्र के दक्षिण तट पर स्थित है। वहाँ जाने के लिए नाव का भी कोई मार्ग नहीं है; क्योंकि इसमें किसी भी प्रकार से गन्तव्य का ज्ञान संभव नहीं है॥ 21॥
 
‘Raghunandan! It is situated on the southern shore of a very far-flung sea. There is no way even for a boat to go there; because it is not possible to know the destination in it in any way.॥ 21॥
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