श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.3.20 
लङ्का पुनर्निरालम्बा देवदुर्गा भयावहा।
नादेयं पार्वतं वान्यं कृत्रिमं च चतुर्विधम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
लंका पर आक्रमण करने के लिए कोई सहारा नहीं है। वह नगरी देवताओं के लिए भी दुर्गम और अत्यंत डरावनी है। उसके चारों ओर चार प्रकार की किलेबंदी है - नदी, पर्वत, वन और कृत्रिम (खाई, प्राचीर आदि)॥ 20॥
 
‘There is no support to attack Lanka. That city is inaccessible and very scary even for the gods. There are four types of fortifications around it – river, mountain, forest and artificial (moat, rampart etc.)॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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