श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.3.19 
स्वयं प्रकृतिमापन्नो युयुत्सू राम रावण:।
उत्थितश्चाप्रमत्तश्च बलानामनुदर्शने॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'रघुनाथजी! रावण स्वयं युद्ध के लिए तत्पर रहते हुए कभी उद्विग्न नहीं होता - वह स्वस्थ और शान्त रहता है। वह सदैव सतर्क रहता है और सेनाओं का बार-बार निरीक्षण करने के लिए तत्पर रहता है॥19॥
 
‘Raghunathji! Ravan himself is never agitated while being eager for war – he remains healthy and calm. He is always alert and prepared to inspect the armies repeatedly.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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