श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.3.18 
एकस्त्वकम्प्यो बलवान् संक्रम: सुमहादृढ:।
काञ्चनैर्बहुभि: स्तम्भैर्वेदिकाभिश्च शोभित:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उनमें से एक शंकरम नामक सेना अत्यंत बलवान और अभेद्य है। वहाँ एक बहुत बड़ी सेना रहती है और वह अनेक स्वर्णमय स्तम्भों और चबूतरों से सुशोभित है॥18॥
 
‘One of them, Sankram, is very strong and impenetrable. A very large army resides there and it is decorated with many golden pillars and platforms.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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