श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.3.17 
त्रायन्ते संक्रमास्तत्र परसैन्यागते सति।
यन्त्रैस्तैरवकीर्यन्ते परिखासु समन्तत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘जब शत्रु की सेना निकट आती है, तब उन टुकड़ियों की रक्षा यंत्रों द्वारा की जाती है और उन यंत्रों की सहायता से उन्हें चारों ओर की खाइयों में फेंक दिया जाता है तथा वहाँ पहुँची हुई शत्रु सेना को भी सब दिशाओं में फेंक दिया जाता है।॥17॥
 
‘When the enemy's army approaches, those contingents are protected by machines and with the help of those machines they are thrown into the trenches on all sides and the enemy forces that reach there are also thrown in all directions.॥ 17॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd