श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.3.16 
द्वारेषु तासां चत्वार: संक्रमा: परमायता:।
यन्त्रैरुपेता बहुभिर्महद्भिर्गृहपङ्क्तिभि:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'उपरोक्त चारों द्वारों के सामने खाइयों के ऊपर चबूतरे के रूप में चार लकड़ी के पुल हैं, जो बहुत चौड़े हैं। उनमें अनेक बड़ी-बड़ी मशीनें लगी हैं और उनके चारों ओर प्राचीरों पर बने मकानों की कतारें हैं।॥16॥
 
‘In front of the above four gates, there are four wooden bridges in the form of platforms over the ditches, which are very wide. Many big machines are installed in them and around them there are rows of houses built on ramparts.॥ 16॥
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