श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.3.14 
सौवर्णस्तु महांस्तस्या: प्राकारो दुष्प्रधर्षण:।
मणिविद्रुमवैदूर्यमुक्ताविरचितान्तर:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस नगर के चारों ओर सोने की एक बहुत ऊँची दीवार है, जिसे तोड़ना बहुत कठिन है। वह बहुमूल्य रत्नों, मूंगों, नीलमणियों और मोतियों से जड़ी हुई है॥14॥
 
‘There is a very high wall made of gold around that city, which is very difficult to break. It is studded with precious stones, corals, sapphires and pearls.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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