श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.3.13 
द्वारेषु संस्कृता भीमा: कालायसमया: शिता:।
शतशो रचिता वीरै: शतघ्न्यो रक्षसां गणै:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इन द्वारों के द्वारों पर काले लोहे से बनी हुई, भयंकर, तीखी और अच्छी तरह से परिष्कृत ऐसी सैकड़ों गदाएँ* (लोहे के काँटों से भरी हुई चार हाथ लंबी गदाएँ) रखी हुई हैं, जो वीर राक्षसों द्वारा बनाई गई हैं॥13॥
 
Hundreds of such maces* (four cubit long maces filled with iron thorns) made of black iron, fearsome and sharp, and well-refined, have been placed on the doors of these gates, which have been made by the valiant Rakshasas.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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