श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.3.11 
दृढबद्धकपाटानि महापरिघवन्ति च।
चत्वारि विपुलान्यस्या द्वाराणि सुमहान्ति च॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उस नगर में चार बड़े द्वार हैं, जो बहुत लम्बे और चौड़े हैं। उनके दरवाजे बहुत मजबूत और मोटे हैं।॥11॥
 
‘That city has four big gates, which are very long and wide. They have very strong doors and thick doors.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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