श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का लङ्का का वर्णन करके भगवान् श्रीराम से सेना को कूच करने की आज्ञा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.3.1 
सुग्रीवस्य वच: श्रुत्वा हेतुमत् परमार्थवत्।
प्रतिजग्राह काकुत्स्थो हनूमन्तमथाब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव के ये युक्तिसंगत एवं हितकर वचन सुनकर भगवान राम ने उन्हें स्वीकार किया और हनुमान से कहा-॥1॥
 
Hearing these reasonable and well-intentioned words of Sugreeva, Lord Rama accepted them and said to Hanuman -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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