श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.29.8 
रिपूणां प्रतिकूलानां युद्धार्थमभिवर्तताम्।
उभाभ्यां सदृशं नाम वक्तुमप्रस्तवे स्तवम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
क्या तुम दोनों ने अपने विरोधी शत्रुओं की, जो युद्ध के लिए आगे आए हैं, बिना कारण प्रशंसा करना उचित था?॥8॥
 
Was it right for both of you to praise the enemies who are against you and have come forward for war, without any reason?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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