श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.29.7 
न तावत् सदृशं नाम सचिवैरुपजीविभि:।
विप्रियं नृपतेर्वक्तुं निग्रहे प्रग्रहे प्रभो:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजा भी कृपा और संयम करने में समर्थ है। उसकी सहायता से जीविका चलाने वाले मंत्रियों को भी उसे अप्रसन्न करने वाली कोई बात नहीं कहनी चाहिए॥7॥
 
‘The king is also capable of showing favour and restraint. The ministers who earn their livelihood with his help should not say anything that displeases him.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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