श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.29.23 
ततस्तं तु महात्मानं चारा राक्षससत्तमम्।
कृत्वा प्रदक्षिणं जग्मुर्यत्र राम: सलक्ष्मण:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वे गुप्तचर राक्षस-मुखधारी रावण की परिक्रमा करके उस स्थान पर गए जहाँ लक्ष्मण सहित श्री राम बैठे हुए थे॥23॥
 
In this way, those spies circumambulated around the demon-headed giant Ravana and went to the place where Shri Ram along with Lakshmana were seated. 23॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas