vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना
»
श्लोक 22
श्लोक
6.29.22
चारास्तु ते तथेत्युक्त्वा प्रहृष्टा राक्षसेश्वरम्।
शार्दूलमग्रत: कृत्वा ततश्चक्रु: प्रदक्षिणम्॥ २२॥
अनुवाद
फिर 'बहुत अच्छा' कहकर प्रसन्नता से भरे हुए गुप्तचरों ने शार्दूल के नेतृत्व में राक्षसराज रावण के चारों ओर परिक्रमा की।
Then saying 'very good', the spies filled with joy, led by Shardul, circled around the demon king Ravana.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas