श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.29.20 
कथं स्वपिति जागर्ति किमद्य च करिष्यति।
विज्ञाय निपुणं सर्वमागन्तव्यमशेषत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वे कैसे सोते हैं? कैसे जागते हैं? और आज क्या करेंगे?—इन सब बातों का भली-भाँति पता लगाओ और फिर लौट आओ॥20॥
 
‘How do they sleep? How do they wake up? And what will they do today?—find out all these things thoroughly and then come back.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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