श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.29.18 
तानब्रवीत् ततो वाक्यं रावणो राक्षसाधिप:।
चारान् प्रत्यायिकान् शूरान् धीरान् विगतसाध्वसान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वे सभी गुप्तचर विश्वसनीय, वीर, धैर्यवान और निर्भीक थे। राक्षसराज रावण ने उनसे कहा -
 
All those spies were trustworthy, brave, patient and fearless. Demon King Ravana said this to them -
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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