श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.29.16 
अब्रवीच्च दशग्रीव: समीपस्थं महोदरम्।
उपस्थापय मे शीघ्रं चारानिति निशाचर:।
महोदरस्तथोक्तस्तु शीघ्रमाज्ञापयच्चरान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद दशमुख रावण ने अपने पास बैठे हुए महोदर से कहा, ‘गुप्तचरों को शीघ्र ही मेरे समक्ष उपस्थित होने की आज्ञा दीजिए।’ यह आदेश पाकर रात्रिकालीन महोदर ने तत्काल गुप्तचरों को अपने समक्ष उपस्थित होने की आज्ञा दी॥ 16॥
 
After this, Dasamukh Ravana said to Mahodar sitting beside him, 'Order the spies to appear before me soon.' On receiving this order, the night-time Mahodar immediately ordered the spies to appear before him.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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