श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 29: रावण का शुक और सारण को फटकारना,उसके भेजे गुप्तचरों का श्रीराम की दया से वानरों के चंगुल से छूटकर लङ्का में आना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.29.11 
किं नु मृत्योर्भयं नास्ति मां वक्तुं परुषं वच:।
यस्य मे शासतो जिह्वा प्रयच्छति शुभाशुभम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मैं इस राज्य का शासक हूँ। मेरी वाणी ही तुम्हें शुभ-अशुभ की प्राप्ति करा सकती है। मैं अपने वचनों से ही तुम्हें रोक सकता हूँ और आशीर्वाद दे सकता हूँ; फिर भी तुम दोनों ने मेरे सामने कठोर वचन बोलने का साहस किया। क्या तुम मृत्यु से नहीं डरते?॥11॥
 
‘I am the ruler of this kingdom. It is my tongue that can make you attain good or bad. I can restrain and bless you with my words alone; yet you both dared to speak harshly in front of me. Are you not afraid of death?॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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