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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 28: शुक के द्वारा सुग्रीव के मन्त्रियों का, मैन्द और द्विविद का, हनुमान् का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.28.20 
यो भिन्द्याद् गगनं बाणैर्मेदिनीं वापि दारयेत्।
यस्य मृत्योरिव क्रोध: शक्रस्येव पराक्रम:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वह अपने बाणों से आकाश को भेद सकता है और पृथ्वी को भी भेदने की क्षमता रखता है। उसका क्रोध मृत्यु के समान और पराक्रम इंद्र के समान है।
 
‘He can pierce the sky with his arrows and has the ability to pierce the earth as well. His anger is like death and his valour is like that of Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)